- उत्तराखण्ड : शहरों का होगा कायाकल्प, 98 छोटे-बड़े शहरों के मास्टर प्लान जल्द होंगे तैयार
- देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, नैनीताल समेत सात शहर अमृत-1 में
देहरादून/लोक संस्कृति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश के सुनियोजित विकास के लिए तैयार की जा रहीं महायोजनाएं जल्द ही धरातल पर उतरेंगी। ख्यातिलब्ध विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से विभाग इसको अंतिम रूप देने में जुटा है। कुल 98 महायोजनाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें अमृत-1 के अंतर्गत 07 और अमृत-2 में 23 महायोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अंतर्गत 7 क्लस्टरों में 65 नगर निकायों और मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत तीन महायोजनाएं तैयार की जा रही हैं। दीर्घकालीन विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी महायोजनाएं वर्ष 2041 और 2045 के लक्ष्य को सामने रखते हुए तैयार की जा रही हैं।
अमृत-1 में चयनित शहर
देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, रुद्रपुर, काशीपुर, नैनीताल और हल्द्वानी।
अमृत-2 में चयनित शहर
पौड़ी जनपद में कोटद्वार, श्रीनगर, पौड़ी, ऊधमसिह नगर जनपद में जसपुर, नगला, खटीमा, किच्छा, बाजपुर, सितारगंज, गदरपुर, नैनीताल जनपद में रामनगर, हरिद्वार जनपद में मंगलौर, लक्सर, चंपावत में टनकपुर, चमोली में गोपेश्वर, देहरादून में ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, उत्तरकाशी एवं टिहरी।
जीआईएस आधारित मास्टर प्लान वाला उत्तराखंड पहला राज्य
उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां द्वितीय और तृतीय श्रेणी के निकायों के लिए भी जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इससे बेहतर भूमि उपयोग, अवैध निर्माण पर नियंत्रण, बेहतर यातायात प्रबंधन, ड्रेनेज योजना और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी।
प्रमुख विशेषताएं
नए महायोजनाओं की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता GIS आधारित प्लानिंग है। इसके माध्यम से शहरों एवं उनके आसपास के क्षेत्रों का तकनीकी एवं समग्र आकलन करते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की योजना तैयार की जा रही है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में सुनियोजित एवं क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विकास, पर्यटन को बढ़ावा, स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसरों का सृजन, भौतिक एवं सामाजिक अवस्थापना सुविधाओं का प्रावधान तथा पर्यावरण का संरक्षण इसका उद्देश्य हैं।
नियोजित विकास पर फोकस:डॉ राजेश
प्रदेश के आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप महायोजनाओं में भविष्य की सभी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियोजित विकास पर फोकस किया गया है। महायोजना से सभी संबंधित कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाएगा।
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की है भागीदारी
महायोजनाएं तैयार करने में प्रदेश सरकार देश के विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ले रही है। इनमें स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) नई दिल्ली,एसपीए भोपाल, एनआईटी कालीकट, एनआईटी सूरत और एमएनआईटी जयपुर प्रमुख हैं।
“प्रदेश के सुनियोजित और दीर्घकालीन शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए मास्टर प्लान बनाए जा रहे हैं। यह महायोजनाएं जहाँ ट्रैफिक जाम, अवैध निर्माण और अव्यवस्थित शहरीकरण से निपटने में सहायक बनेंगी, वहीं आम जनता को बेहतर सड़कें और अन्य सुविधाएं मिलेंगी।”
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड
Share the post "उत्तराखण्ड : शहरों का होगा कायाकल्प, 98 छोटे-बड़े शहरों के मास्टर प्लान जल्द होंगे तैयार"

