आसान नहीं चार धाम की यात्रा (Char Dham Yatra)

आसान नहीं चार धाम की यात्रा (Char Dham Yatra)

हरीश चन्द्र अन्डोला

केदारनाथ, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब में पैदल मार्ग श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बने हुए हैं।वर्षा- बर्फबारी होने पर तो स्थिति खतरनाकरहती ही है, सामान्य दिनों में भी इन पर सफर करना आसान नहीं। बर्फ पिघलने से तीनों पैदल मार्ग पर हर समय फिसलन बनी रहती है। पहाड़ी से पत्थर भी गिरते रहते हैं। इसके चलते प्रतिदिन तीर्थयात्री घायल हो रहे हैं।केदारनाथ पैदल मार्ग पर अब तक 634 तीर्थयात्री चोटिल हो चुके हैं, जबकि 19 घोड़ा-खच्चर की फिसलने से मौत हुई। यमुनोत्री पैदल मार्ग पर 470 तीर्थयात्री चोटिल हुए हैं। यहां 21 घोड़ा-खच्चर की भी मौत हुई है। हालांकि, अधिकांश बीमारी के कारण मरे। इधर, हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग पर 20 से अधिक तीर्थयात्री फिसलने और हिमखंड की चपेट में आने से घायल हुए हैं। यहां एक महिला श्रद्धालु की हिमखंड की चपेट में आने से मौत हुई है।

गौरीकुंड से केदारनाथ धाम के बीच 16 किमी लंबे पैदल मार्ग पर जगह-जगह फिसलन है,जो यात्रियों के साथ घोड़ा-खच्चर का संतुलन बिगाड़ रही है। सर्वाधिक फिसलन लिनचोली से केदारनाथ तक पांच किमी क्षेत्र में है। यहां भैरव और कुबेर गदेरा समेत चार स्थानों पर बर्फ काटकर मार्ग बनाया गया है। ऐसे में थोड़ी सी वर्षा-बर्फबारी परेशानी खड़ी कर देती है। यहीं पर सबसे अधिक दुर्घटनाएं हो रही हैं। मार्ग पर पहाड़ी से पत्थर भी गिर रहे हैं। गौरीकुंड से भीमबली तक छह किमी क्षेत्र में यह खतरा सबसे ज्यादा है।यमुनोत्री पहुंचने के लिए जानकीचट्टी से छह किमी खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है। यह पैदल मार्ग राम मंदिर, भंगेलीगाड, नौ कैंची व भैरव मंदिर के पास काफी संकरा है।

भंगेलीगाड से भैरवमंदिर के बीच ढाई किमी का क्षेत्रसबसे अधिक खतरनाक है। यहां प्रतिदिन घोड़ा-खच्चर और तीर्थयात्री फिसलकर चोटिल होते हैं। इस क्षेत्र में छह स्थानों पर मार्ग की ऊंचाई काफी कम है। ऐसे में घोड़ा-खच्चर पर बैठे तीर्थयात्री को पूरी तरह झुकना पड़ता है,अन्यथा वह पहाड़ी से टकराकर चोटिल हो जाता है। कई जगह कीचड़ भी चुनौती बना हुआ है। इससे जाम की स्थिति भी बन रही है। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 19 किमी लंबा पैदल मार्ग काफी चुनौतीपूर्ण है। इस मार्ग पर यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी अटलाकोटी ग्लेशियर में होती है। धाम से करीब दो किमी पहले स्थित इस क्षेत्र में बड़े-बड़े हिमखंड हैं। इन्हें काटकर रास्ता बनाया गया है। यहां हर समय हिमखंड टूटने की आशंका बनी रहती है। रविवार को यहां हिमखंड टूटने से एक ही परिवार के छह सदस्य उसकी चपेट में आ गए थे। इनमें से एक की मौत हो गई।

गढ़वाल मंडल के आयुक्त ने कहा कि पैदल यात्रा मार्गों पर मौसम चुनौतियां खड़ी कर रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह मार्ग दुरुस्त रखें। घोड़ा-खच्चर संचालकों को भी एहतियात के साथ तीर्थ यात्रियों को ले जाने के लिए कहा गया है। पशुओं के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर यात्रा सीजन के पहले 45 दिन के लिए सरकार ने यह व्यवस्था की है। इस संबंध में पूर्व के शासनादेश में आंशिक संशोधन कर नया शासनादेश जारी किया गया है। संशोधित शासनादेश के अनुसार तीर्थ यात्रियों की सुविधा के दृष्टिगत यह संख्या निर्धारित की गई है। इंसानियत को मानने वालों और ह्यूमन राइट्स कमीशन तथा पशुओं के प्रति अत्याचार रोकने केलिए बनी संस्थाओं की अब तक इस अमानवीय व्यवस्था पर नजर क्यों नहीं पड़ी, यह आश्वर्य और खेद का विषय है। इसमें सरकार की भागीदारी भी है क्योंकि जो राशि इन मजदूरों को यात्रियों द्वारा दी जाती है, विश्वविख्यात चारधाम यात्रा में शामिल होने वाले तीर्थ यात्रियों के ताज़ा आंकड़ों की बात करें तो अभी तक 20 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं जबकि 40 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पंजीकरण भी करा चुके हैं।ब द्री–केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष ने चारों धामों में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के ताज़ा आंकड़ों के बारे में बताते हुए कहा कि केदारनाथ में 7 लाख 13 हजार, बदरीनाथ में 5 लाख 80 हजार यानी अब तक बद्री–केदार धाम में 13 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। सरकार की ओर से चार धाम यात्रा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को एक बड़ी राहत देने वाला काम किया गया है।

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली बार उत्तराखंड सरकार ने चार धाम तीर्थयात्रियों को परेशानी मुक्त यात्रा देने के लिए गूगल मैप्स और मैपल्स ऐप के साथ करार किया है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर मुसीबत बने ग्लेशियर प्वाइंट, मॉनसून से पहले ही बढ़ी मुश्किलें विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए यात्रियों की भीड़ उमड़ रही है। यात्रियों की संख्या में इजाफा होने से पैदल मार्ग के ग्लेशियर प्वाइंट पर जाम लग रहा है। अभी तक जून महीने में पैदल मार्ग पर ग्लेशियर नजर नहीं आते थे, लेकिन इस बार जून में बर्फबारी जारी है। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर ग्लेशियर प्वाइंट पर जवान तैनात किए गए हैं। उधर, इस बार बारिश की वजह से गर्मी के मौसम का एहसास नहीं हो रहा है। बारिश होने से अभी से ही मॉनसून सीजन को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर मुसीबत बने ग्लेशियर प्वाइंट, मॉनसून से पहले ही बढ़ी मुश्किलें विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए यात्रियों की भीड़ उमड़ रही है। यात्रियों की संख्या में इजाफा होने से पैदल मार्ग के ग्लेशियर प्वाइंट पर जाम लग रहा है। अभी तक जून महीने में पैदल मार्ग पर ग्लेशियर नजर नहीं आते थे, लेकिन इस बार जून में बर्फबारी जारी है। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर ग्लेशियर प्वाइंट पर जवान तैनात किए गए हैं। उधर, इस बार बारिश की वजह से गर्मी के मौसम का एहसास नहीं हो रहा है। बारिश होने से अभी से ही मॉनसून सीजन को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है। ये जिम्मेदारी केवल सरकार ही नहीं, सबकी है। हमने राज्य में जियो टैगिंग अध्ययन के अलावा ढलान, भूमि के संबंध में तकनीकी अध्ययन के साथ कदम बढ़ाने शुरु कर दिए हैं। आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन के लिए और क्या बेहतर हो सकता है, लेखक दून विश्वविद्यालय कार्यरत हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *