काले गेहूं की खेती के प्रयास शुरू

काले गेहूं की खेती के प्रयास शुरू

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

उत्तरकाशी में काले गेंहॅूं की खेती करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। सामान्य गेहॅूं की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक कीमत वाले काले गेहॅूं के जरिए किसानों की कमाई बढाने के लिए जिले में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला ने डुण्डा ब्लॉक के गेंवला (बरसाली) गांव जाकर इस नई मुहिम से जुड़ने के लिए किसानों को प्रेरित किया और काले गेंहॅूं के बीज वितरित किए। जिले में लाल धान के रकबे को गंगा घाटी तक विस्तारित करने की कामयाब पहल से प्रभावित किसानों ने इस नई मुहिम को लेकर काफी उत्साह दिखाया है। काले गेहॅूं की इस मुहिम के बीज आगामी नवंबर महीने में खेतों में बोए जाएंगे।काला गेंहॅूं की खेती का चलन हाल के कुछ सालों से ही देश के कुछ चुनिंदा हिस्सों में शुरू हुआ है।

नेशनल एग्रीफूड बॉयोटेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट (नाबी) मोहाली को देश में काले गेंहॅूं को विकसित करने का श्रेय जाता है। नॉन जीएम फसल के तौर पर विकसित काले गेहॅूं में एन्थ्रोसाईनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट तत्व काफी अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही इसमें महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के साथ ही फाईबर की प्रचुरता होने और काबेहाईड्रेट व ग्लूटेन की संतुलित मात्रा के चलते काले गेंहॅूं को आम गेंहॅूं की तुलना में स्वास्थ्य के लिए काफी गुणकारी माना जाता है। सामान्य गेेंहॅूं से तिगुनी से भी अधिक कीमत में बिकने वाले वाले कालें गेंहूं की बाजार में मांग दिनों-दिन बढती जा रही है। काले गेंहूं से किसानों की आजीविका के अवसरों में वृद्धि की संभावना को देखते हुए जिले में कृषि विभाग के माध्यम से काले गेंहॅूं की खेती शुरू करने की मुहिम चलाने का निश्चय किया गया है।

जिले के चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के कामदा गांव के प्रगतिशील किसान काले गेहॅूं उगाने का सफल प्रयोग कर चुके हैं। इस सफलता से जिले में काले गेंहॅूं की खेती की बेहतर संभावना दिखी तो प्रशासन ने इसे बढावा देने के लिए जिले के डुण्डा व नौगांव ब्लॉक के कुछ गांवों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की कवायद शुरू कर दी है।इस मुहिम के तहत जिलाधिकारी ने मुख्य कृषि अधिकारी के साथ गेंवला गांव जाकर किसानों एवं महिला समूहों से इस संभावनाशील खेती को प्रयोग के तौर पर अपनाने का आग्रह किया। लाल धान की खेती की पिछली पहल की कामयाबी से उत्साहित किसानों ने प्रशासन एवं कृषि विभाग की इस नई पहल को हाथों- हाथ लिया।

जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को काले गेंहॅूं के बीज वितरित करते हुए कहा कि पारंपरिक खेती के साथ ही प्रयोग के तौर पर कुछ जमीन पर काले गेंहॅूं की खेती कर ग्रामीणों को अपनी आजीविका में वृद्धि की संभावनाओं के विकल्पों को भी आजमाना चाहिए। इसके लिए कृषि विभाग किसानों को पूरा सहयोग करेगा और उत्पादित गेहॅूं की खरीद की जिम्मेदारी भी लेगा। यह प्रयोग सफल रहने पर अगले दौर में इसे ज्यादा विस्तार देने पर विचार किया जाएगा। जिलाधिकारी ने किसानों को जैविक एवं पारंपरिक अन्न की खेती के गुणकारी पहलुओं की जानकारी देते हुए इसे लाभकारी बनाए जाने के उपायों पर भी ग्रामीणों से चर्चा करतेे हुए कहा कि हमें खेती के तौर-तरीकों में अनुकूल बदलाव के लिए हमेशा तैयार रहें।

मुख्य कृषि अधिकारी ने किसानों को काले गेंहूं की खेती एवं इससे जुड़ी संभावनाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि फसल प्रणाली में बदलाव लाकर किसानों की आमदनी को बढाने के लिए इस तरह के अभिनव प्रयासों को कामयाब बनाने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लिहाजा विभाग उन्हें पूरा प्रोत्साहन देगा। उन्होंने कहा कि पिछले दौर में लाल धान की खेती के प्रयास को किसानों से मिली सराहना के बाद अब किसानों ने काले गेहॅूं की खेती में भी हाथ आजमाने को लेकर काफी उत्साह दिखाया है। गेंवला गांव में कालें गेहॅूं की खेती के लिए के प्रयोग में 15 किसानों का सहयोग लिया जा रहा है। इसके साथ ही नौगांव ब्लॉक में भी किसानों को इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है। ग्राम प्रधान सहित गेंवला के ग्रामीणें व महिला समूहों की सदस्यों ने उम्मीद जताई कि यह नई पहल किसानों के लिए बेहतर साबित हो सकती है, और भरोसा जताया कि वे इस मुहिम को कामयाब बनाकर अन्य किसानों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेंगे। एन्थोसाइनीन पिगमेंट की मात्रा ज्यादा होने के कारण ये गेहूं काले होते हैं।

एंथ्रोसाइनीन एक नेचुरल एंटी ऑक्सीडेंट व एंटीबायोटिक होता है। सबसे खास बात है कि इस प्रजाति में सामान्य गेहूं के मुकाबले कहीं ज्यादा पोषक तत्व होते हैं । जिसके कारण कई तरह की बीमारियों में इसका सेवन करने से फायदा मिलता है। यह दिल के रोगों को दूर करता है। यहां तक कि इससे पेट के कैंसर, हाई ब्लडप्रेशर , डायबिटीज , कब्ज एवं एनीमिया जैसे बड़े बड़े रोगों का उपचार भी संभव हो पाता है। काले गेँहू की खासियत है कि यह सामान्य गेहूं की तरह घास पर नहीं होते हैं। भारत में इस गेहूं की प्रजाति पर कई वर्षों से प्रयोग किए जा रहे हैं इसकी खेती श्री विधि से की जाती है। जिससे इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके। इस विधि से खेती करने पर तेज हवा एवं तेज पानी से फसल का नुकसान नहीं होता और उसमें बल्लिया भी ज्यादा होती है। जिससे पैदावार बढ़ जाती है।

काले गेहूं की बुवाई सही समय पर एवं पर्याप्त नमी वाले वातावरण में ही करना चाहिए। इसका उत्पादन सामान्य गेहूं की तरह ही होता है जो कि 10 से 12 क्विंटल प्रति बीघा की उपज देता है।काले गेहूं को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी कई प्रयास कर रही है। इस पर अच्छा समर्थन मूल्य प्रदान करके इसका उत्पादन बढ़ाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ज़्यादा पोषक तत्व और कम उत्पादन के कारण इसकी बाजार में मांग भी ज़्यादा होती है।और इसीलिए इससे लाभ मिलने की संभावना ज़्यादा है।

( लेखक दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं )

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