इसी क्रम में आज प्रदेशभर के अधिकांश हिस्सों में अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने को लेकर व्यापारियों ने खासा समर्थन दिया। हालांकि दून उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारियों ने उत्तराखंड बंद को औचित्यहीन और राजनीति से प्रेरित बताया और अपने प्रतिष्ठान खुले रखे। बावजूद इसके संघर्ष समिति से जुड़े कार्यकर्ताओं के अनुरोध पर देहरादून में भी व्यापारियों का सहयोग मिला और कई क्षेत्रों में दोपहर तक दुकानें बंद रखी गई।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से मोहित डिमरी ने तमाम व्यापारियों एवं साथियों का धन्यवाद जताया, जिन्होंने इस बंद को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा कि आज के उत्तराखंड बंद का राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक असर देखने को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि देहरादून शहर में बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। यहां पर तमाम संगठनों ने पलटन बाजार में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद करवाए, लेकिन जिस तरह से भाजपा व उसकी सरकार ने बंद को विफल करने के लिए पूरी ताकत झोंक ली थी, यहां तक कि पूरी मशीनरी पूरी मशीनरी जुटा ली थी कि ये बंद सफल नहीं होना चाहिए, पर आपने देखा होगा कि देहरादून में तमाम व्यापारिक संगठन, भाजपा से जुड़े हुए पदाधिकारियों ने कल ही ऐलान कर दिया था कि हम बंद को सपोर्ट नहीं करेंगे, और आपने देखा भी होगा कि भाजपा के दायित्वधारी जो उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने कहा कि हम बंद को सपोर्ट नहीं करेंगे। बावजूद इसके हम आपसे कहना चाहते हैं कि कौन उत्तराखंड का अपना है और कौन पराया है। ये बात भी साबित हो गई है कि अंकिता के न्याय के लिए कौन लड़ाई लड़ रहा है और कौन उन वीआईपी की ढाल बन रहा है, ये बात भी आज सामने आ गई है।

आज हुए बंद के दौरान पौड़ी व श्रीनगर में जबर्दस्त समर्थन मिला। चमोली के नंदानगर, जोशीमठ, गढी, श्यामपुर, रायवाला, खदरी, ऋषिकेश, गैरसैंण, महलचौरी, कीर्तिनगर, श्रीकोट, लंबगांव, प्रतापनगर, नारायणबगड़, आदि बागेश्वर, देवप्रयाग, गौचर, नई टिहरी, चंबा, घनसाली, सतपुली के साथ ही कुमाऊं मंडल के अधिकांश क्षेत्रों में बंद का व्यापक असर देखा गया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आज के बंद को सफल बताते हुए हष जताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभित्र राजनैतिक व सामाजिक संगठनों द्वारा अंकिता को न्याय दिलाने के लिए आज का बंद अभूतपूर्व रहा। उन्होंने कहा कि यह अभूतपूर्व इसलिए रहा, क्योंकि उत्तराखंड आंदोलन के बाद आज पहली बार उस प्रकार का बंद देखने को मिला। ये बंद स्वस्फूर्त था। किसी ने भी किसी को बंद के लिए मजबूर नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि देहरादून में भाजपा व सरकार ने पूरी कोशिश की कि जबदस्ती लोगों से दुकानें खुलवाई जाएं। हालांकि लोगों ने इस बंद कार्यक्रम में जोरदार समर्थन किया।