पर्यटन दिवस प्रकृति और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करता है

पर्यटन दिवस प्रकृति और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करता है

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

साल 1980 में पहली बार विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया था, जिसकी शुरुआत के पीछे संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन था। जानकारी के मुताबिक इस खास दिन को मनाने के लिए 27 सितंबर की ही तारीख इसलिए चुनी गई,क्योंकि इसी दिन साल 1980 में संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन को मान्यता प्राप्त हुई थी। लिहाजा संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन की वर्षगांठ के मौके पर ही विश्व पर्यटन दिवस मनया जाता है। हर साल विश्व पर्यटन दिवस की एक खास थीम तय की जाती है। जिसे यथास्थिति के अनुरुप तय किया जाता है। जहां कोरोना महामारी और उससे हुई परेशानी के मद्देनजर बीते साल की थीम, Rethinking Tourism तय की गई थी। वहीं इसबार विश्व पर्यटन दिवस 2023 की थीम Tourism And Green Investments तय की गई है  विश्व पर्यटन दिवस का उद्देश्य विश्व भर में लोगों में पर्यटन के लिए जागरूकता पैदा करना और इसके लिए प्रेरित करना है। पर्यटन ही वो माध्यम है जिससे अलग- अलग कल्चर से लोगों को जुड़ने और जानने का मौका मिलता है।

हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। टूरिज्म किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा सेक्टर है। टूरिज्म के जरिए लाखों-करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है और उनका पेट पलता है।पर्यटन के जरिए इंसान भिन्न-भिन्न जगहों के बारे में जानकारी हासिल करता है, और उनकी सभ्यता और संस्कृति से रूबरू होता है। कोरोना काल के दौरान दुनियाभर के देशों के टूरिज्म को झटका लगा था और उनकी अर्थव्यवस्था बैठ गई थी। कोरोना के बाद टूरिज्म सेक्टर ने फिर से रफ्तार पकड़ी और लोग अपने घरों से बाहर निकलकर अलग-अलग देशों और टूरिस्ट डेस्टिनेशन की सैर करने लगे। विश्व पर्यटन दिवस पर एडवेंचर टूरिज्म के शौकीनों को शासन ने जोर का झटका दिया है। गंगोत्री नेशनल पार्क सहित कई राष्ट्रीय पार्कों, वन्य जीव विहार के प्रवेश शुल्क में 33.33 फीसदी बढ़ोतरी कर दी गई है। उत्तरकाशी के गंगोत्री नेशनल पार्क व गोविंद वन्यजीव विहार में यह बढ़ोतरी बुधवार से ही लागू होगी। उधर, फूलों की घाटी के दर्शन तो महंगे हो ही चुके हैं। प्रदेश का नैसर्गिक प्राकृतिक सौन्दर्य सदियों से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है।

हमारे चार धाम सदियों से देश व दुनिया के करोड़ों लोगों के आस्था के केंद्र रहे हैं। राज्य की आर्थिकी को मजबूती देने में पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि पर्यटन की किसी भी देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। रोड़ कनेक्टिविटी एवं हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार से निश्चित रूप से राज्य के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की आर्थिकी के लिए लाभकारी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन दिवस का उद्देश्य लोगों को पर्यटन के महत्व के प्रति जागरूक करना भी रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से पूरा उत्तराखण्ड ही एक डेस्टिनेशन है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के भी प्रयास किये जा रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों को हैली सेवा से जोड़ने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। पहाड़ में रेल का सपना पूरा होने जा रहा है। राज्य के नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटन, उद्योग एवं व्यापार की यहां अपार संभावनाएं हैं। राज्य में होम स्टे को और बढ़ावा दिया जा रहा हैं। इससे ग्रामीण पर्यटन तथा आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एडवेंचर और वेलनेस टूरिज्म के जरिए उत्तराखण्ड को वैश्विक पर्यटन स्थल बनाने का भी हमारा प्रयास है। पर्यटन राज्य के विकास और रोजगार दोनों का आधार भी है। पर्यटन स्थल हमारी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक सभ्यताओं के प्रतीक तथा हमारी पहचान हैं। दिव्यता एवं आध्यात्मिक अनुभूति के केंद्र उत्तराखंड में पर्यटन को रोजगार से जोड़ने के लिए नए पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना संचालित की जा रही है। टूरिज्म के शौकीनों को शासन ने जोर का झटका दिया है।

गंगोत्री नेशनल पार्क सहित कई राष्ट्रीय पार्कों, वन्य जीव विहार के प्रवेश शुल्क में 33.33 फीसदी बढ़ोतरी कर दी गई है। उत्तरकाशी के गंगोत्री नेशनल पार्क व गोविंद वन्यजीव विहार में यह बढ़ोतरी बुधवार से ही लागू होगी। उधर, फूलों की घाटी के दर्शन तो महंगे हो ही चुके हैं। राज्य के कार्बेट टाइगर रिजर्व में भी 150 फीसदी तक प्रवेश शुल्क बढ़ा दिया है। यहां अभी भारतीय सैलानियों से जहां 200 रुपये शुल्क लिया जाता था, वहीं बुधवार से उन्हें 500 रुपये चुकाने होंगे। विदेशियों को 900 रुपये की जगह 1500 रुपये देने होंगे। उधर, राजाजी टाइगर रिजर्व में भारतीय पर्यटकों को 150 की जगह 300 रुपये, जबकि विदेशियों को 600 की जगह 1000 रुपये प्रवेश शुल्क देना होगा। इससे पूर्व शासन ने वर्ष 2009 में शुल्क बताया था। यानी करीब 14 साल बाद प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। प्रवेश शुल्क के अलावा वाहन शुल्क, वन विश्राम गृहों के किराया भी बढ़ाया गया है। इन मुद्दों के समाधान के लिए पर्यटन क्षेत्र में हरित निवेश आवश्यक है।

यहां पाठकों को यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि राष्ट्रीय पर्यटन दिवस की थीम : साल 2022-23 में यह दिवस आजादी का अमृत महोत्सव रखी गई थी । पर्यटन को देश में सबसे अच्छा आय जनरेटर माना जाता है। यह उच्च वित्तीय आय और उच्च वित्तीय सूचकांक ला सकता है, इसलिए पर्यटन बहुत ही महत्वपूर्ण है। जानकारी देना चाहूंगा कि 27 सितंबर का दिन सतत विकास के लिए वर्ष 2030 एजेंडा में उल्लिखित वैश्विक चुनौतियों के बारे में जागरूकता फैलाने और पर्यटन उद्योग द्वारा सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों को रेखांकित करने के लिए भी मनाया जाता है।पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार वैश्विक निकाय संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) 1980 से 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मना रहा है। यह तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन यूएनडब्ल्यूटीओ ने अपने क़ानून को अपनाया था। क़ानून को वैश्विक पर्यटन क्षेत्र में मील का पत्थर माना जाता है।

उल्लेखनीय है कि सितंबर 1979 (टोर्रेमोलिनोस, स्पेन) में एक यूएनडब्ल्यूटीओ महासभा प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें 1980 से विश्व पर्यटन दिवस की स्थापना की गई थी।पर्यटन एक बड़ा उधोग है जो धन लाता है, रोजगार पैदा करता है, देश के विकास को बढ़ावा देता है , यह प्रकृति और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करता है। इतना ही नहीं यह अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को बढ़ावा देने का काम करता है, यह राष्ट्रों को वैश्विक मानचित्र पर रखने में मदद करता है। इस बार सऊदी अरब विश्व पर्यटन दिवस 2023 की मेजबानी कर रहा है।विश्व पर्यटन दिवस 2023 का विषय, पर्यटनऔर हरित निवेश सामयिक और महत्वपूर्ण दोनों है। यह पर्यटन के पर्यावरणीय प्रभाव और टिकाऊ प्रथाओं की आवश्यकता के बारे में बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।

जैसे-जैसे पर्यटन उद्योग का विस्तार जारी है, यह अपने साथ कई चुनौतियाँ लेकर आता है, जिनमें बढ़ा हुआ कार्बन उत्सर्जन, निवास स्थान का विनाश और प्राकृतिक संसाधनों पर दबावशामिल है। पर्यटन भी रोजगार का एक साधन है और पर्यटन दुनिया भर में रोजगारका सृजन करने और दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए भविष्य बनाने में मदद करता है। जानकारी देना चाहूंगा कि पर्यटन रोजगार का ही सृजन नहीं करता है,
अपितु यह(पर्यटन) वैश्विक रूप से, विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तथा आर्थिक मूल्यों को बढ़ाने में तथा आपसी समझ बढ़ाने में भी सहायता करता है।

विश्व पर्यटन दिवस हमें पर्यटन के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता है, लेकिन हमें इसके दुष्प्रभावों के बारे में भी सोचने की आवश्यकता है। हमें सामरिकता, पर्यावरण सजावट, और सामाजिक शिक्षा के माध्यम से पर्यटन को सुधारने का काम करना होगा ताकि यह हमारे समाज और पर्यावरण के लिए एक साथ काम कर सके और हमारे आने वाले पीढ़ियों को एक समृद्ध और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर कर सके।

( लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं )